देहरादून पुलिस ने नीट-यूजी 2025 में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर एमबीबीएस में दाखिला दिलाने के मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आज 10 सदस्यीय एसआईटी टीम स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के नाम पर बने फर्जी सर्टिफिकेट से एमबीबीएस और बीडीएस में एडमिशन लेने वाले आरोपियों की जांच के लिए हरिद्वार पहुंची थी। उधर दो आरोपियों को पूछताछ के लिए देहरादून के रायपुर थाने बुलाया गया था। पूछताछ के बाद वहीं दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया।
एसएसपी प्रमेन्द्र सिंह डोबाल ने बताया कि 13 सितंबर 2026 को राजस्व उपनिरीक्षक कंडोली, सदर देहरादून जगदीश सिंह की ओर से थाना रायपुर में शिकायत दी गई। जांच में सामने आया है कि रूपेश पंडित नाम के आरोपी ने प्रमाणपत्र बनवाने का ठेका लिया था। इसके लिए करीब 45-45 लाख रुपये में सौदा किए जाने की बात सामने आई है।
एसआईटी के अनुसार आरोपी अरविंद कुमार ने खुलासा किया कि उसने अपनी बेटी के फर्जी सर्टिफिकेट बनाने के लिए 20 लाख रुपए दिए थे। अरविंद की बेटी के खिलाफ भी थाना रायपुर में मुकदमा दर्ज हुआ था। पूछताछ में पुलिस को पता चला कि गिरफ्तार आरोपित रूपेश पंडित निवासी ग्राम शिवपुरी थाना केहाट, जिला पूर्णिया बिहार वर्तमान निवासी द्वारिका पूरी कालोनी जनपद मेरठ उत्तर प्रदेश पिछले करीब पांच वर्षों से एजुकेशन कंसल्टेंसी का काम कर रहा था।
इन्हीं प्रमाणपत्रों के आधार पर अभ्यर्थियों ने अलग-अलग मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस सीट के लिए आवेदन किया था। एसआईटी मामले में शामिल अन्य लोगों की भूमिका और दस्तावेज तैयार करने की पूरी प्रक्रिया की जांच कर रही है।


